Connective tissue

Connective tissue | Muscular tissue

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 संयोजी उत्तक (Connective tissue)

  • संयोजी उत्तक प्राणियों के विभिन्न अंगों और ऊतकों को संबंध करता हैं । 
  • यह  उन्हें  कुछ अवलंब भी दे सकता हैं । 
  •  इस उत्तक में कोशिकाओ की संख्या कम होती है और अंत: कोशिकीय पदार्थ का आधिक्य होता हैं । 

संयोजी ऊतक के प्रकार- 

इसके निम्नलिखित प्रकार होते हैं-

  • 1. अवकाशी उत्तक (Areolar tissue )
  • 2. कंडरा (tendon) 
  • 3. स्नायु (Ligament)
  • 4. जालवत संयोजी उत्तक ( Reticular connective tissue )
  • 5. वसा संयोजी उत्तक (Adipose connective tissue)
  • 6. रंजित संयोजी उत्तक (Pigmented connective tissue )
  • 7. उपास्थीय उत्तक (Cartilaginous tissue)
  • 8. अस्थिमय उत्तक (Bony tissue)
  • 9. रुधिर या रक्त (Blood)
  • 10. लसीका (Lymph)

रुधिर एवं लसीका  को  तरल संयोजी ऊतक (liquid connective tissue )  कहते हैं। 

1. अवकाशी उत्तक (Areolar tissue )

  •  यह उत्तक रुधिरवाहिनियों और तंत्रिकाओ  के चारों तरफ घेरा बनाता है। 
  •  यह सामान्य: रिक्त  स्थानों को भरता है , जैसे डिंबकोष का पंजर (stroma of ovary )
  • इस  उत्तक में  कोशिकाएं तंतु  और एक आधार-द्रव्य (ground substance) होता हैं । 
  • अवकशी (areolar) संयोजी उत्तक में पाई जानेवाली कोशिकाएँ ।
  •  अवकाशी उत्तक के कार्य :- 
  • यह शरीर की   विभिन्न वस्तुओं  को ढीले रूप से बांधकर  उन्हें अपने स्थान पर रहने में मदद करता है। 
  •  यह दो उत्तकों  के बीच एक गद्दी का काम करता है। 
  •  लिंफोसाइट  का एंटीबॉडी (antibody)  संश्लेषण से संबद्ध होता हैं । 

2. कंडरा (Tendon)  

  • ये श्वेत या कलेजेनोत्पादी तंतुओ के समूहों से बड़ा होता है। 
  • तंतुओ के समूहों के बीच बीच कंडरा कोशिकाएँ  कतारों में पाए जाते हैं। 
  • प्रत्येक तंतु-समूह चारों ओर थोड़े  अदृद संयोजी उत्तक पाए जाते हैं । 
  • उत्तक हड्डी को पेशी (muscle) से जोड़ता हैं ।    

3. स्नायु (Ligament) :- 

  • सामान्यतः  ये  कलेजेनोत्पादी तंतुओ  की बनी होती है, परंतु पीत प्रत्यास्थ स्नायु समांतर पीत प्रत्यास्थ तंतुओ (yellow elastic fibres ) से बनती हैं । 
  • ये तंतु अदृद संयोजी उत्तक द्वारा  संबद्ध रहते हैं । यह एक हड्डी को दूसरी हड्डी से जोड़ता है।  

4. जालवत संयोजी उत्तक ( Reticular connective tissue ) :- 

  • इस  उत्तक में जाल कोशिकाएं (reticular cells ) और कलेजेनोत्पादी तंतुओ का जाल पाया जाता है । 
  • कुछ प्रत्यास्थ तंतु भी मौजूद रह सकते हैं । 
  • यह लसीका ग्रथियों (Lymph nodes),प्लीहा (spleen), थाइमस (thymus) और अस्थिमज्जा (bone marrow) में पाया जाता हैं । 

5. वसा संयोजी उत्तक (Adipose connective tissue)

  • इस ऊतक में तंतु और विशेष प्रकार की  वसा कोशिकाओं  या  एडिपोसाइट मे परिवर्तित हो जाते हैं
  • प्रारंभ में  इन कोशिकाओं में वसा  की छोटी-छोटी बुंदे भी  पाई जाती है, परंतु जैसे-जैसे कोशिकाएं बढ़ती  जाती है  और अंत में कई बूंदे मिलकर एक बड़ी  वसा गोलीका बनाती है। 
  •  इस गोलीका के बनने के कारण  कोशिका द्रव्य कोशिका के परिधिस्थ  क्षेत्र में चला जाता है और इसी भाग में एक  चपटा केंद्रक होता है। 
  •  यह उत्तक  अंत: त्वचा मे, वृक्क  के क्षेत्र में और आंत्रयोजनी (mesentery) में पाया जाता है। 

 कार्य (functions) :-

  •  यह उत्तक संचित करता है  और भोजन में काम आता है। 
  •  यह आघात रहस्य गद्दी बनाता है। 
  •  शरीर के ताप को बनाए रखता है, क्योंकि वसा असंवाही हैं ।

6. रंजित संयोजी उत्तक (Pigmented connective tissue ):- 

  • यह उत्तक  क्षेत्र के  रंजीत पटल (choroid),और आईरिस (iris) और डर्मिस (dermis) में  पाया जाता है। 
  • रंजित कोशिकाएं बड़ी और शाखीय होती है। 
  • इसमें रंजक  कण (pigment )पाए जाते हैं। 
  • त्वचा और आइरिस का रंग इन्हीं  रंजक कणों के कारण होता है। 
  •  त्वचा के एपिद्मिर्स के आधार पर मेलनोसाइट  कोशिकाओं में  मेलानिन कण पाए जाते हैं । 

7. उपास्थीय उत्तक (Cartilaginous tissue) :- 

  • उपास्थियों कोशिकाओ ,तंतुओ और आधार-द्रव्य से बनती हैं । 
  • इनकी कोशिकाओ को उपास्थि कोशिकाए कहते हैं जो गर्तिकाओ (lacuna) में पाई जाती हैं । 
  • उपास्थियाँ मक्छलियों (जैसे Socoliodon) का कंकाल उपास्थि का ही बना होता हैं । 
  • उच्च प्रकार के कशेरुकी प्राणियों में भी उपास्थि वायु-नली,स्वरयंत्र (कंठ) आदि में पाई जाती है । 
  • आधार-द्रव्य और तंतुओ की प्रकृति के आधार पर उपस्थिओ चार प्रकार की होती है । 
  • (i) प्रभासी (hyaline)  
  • (ii) कैल्सिफाइड (calcified)
  • (iii) श्वेत तंतुमय (white fibrous)
  • (iv) पीत प्रत्यास्थ (yellow elastic)

पेशी उत्तक (Muscular tissue)  

  • शरीर के सभी पेशियाँ इसी उत्तक से मिलकर बनी होती हैं । 
  • पेशी उत्तक में संकुचन एवं शिथिलन के कारण ही जीवों में गति होती हैं । 
  • पेशी उत्तक Muscles fibres से बनता हैं । 
  • Muscles fibres एक प्रकार की कोशिका से विकास करता है , जिसे म्योब्लास्ट myoblast कहते हैं । 
पेशी उत्तक (Muscular tissue)
पेशी उत्तक (Muscular tissue)

पेशी उत्तक तीन प्रकार के होते हैं – 

  • (i)अरेखित पेशियाँ (Unstriped muscles)
  • (ii) रेखित पेशियाँ (Striped muscles)
  • (iii)हृदय पेशियाँ  (Cardiac muscles) 

(i)अरेखित पेशियाँ (Unstriped muscles) :-

  • अरेखित पेशियाँ को smooth muscles या involuntary muscles कहते हैं । 
  • ये पेशिया पतली,लम्बी एवं तर्कु के आकार की होती हैं । 
  • ये हमारी इच्छानुसार कार्य नहीं करती हैं । 
  • इसलिए इन्हें अनैच्छिक पेशी कहते हैं । 

(ii) रेखित पेशियाँ (Striped muscles) :-

  •  इन्हें एच्छिक पेशियाँ भी कहते हैं तथा इन पेशियों में अनेक तन्तु होते हैं । 
  • तन्तु के कोशिका द्रव्य में fibres जैसी रचना पायी जाती हैं,जिसे sarcrolemma कहते हैं । 
  • Myofibrils एक झिल्ली से घिरी होती हैं, जिसे sarcrolemma कहते हैं । 
  • इस पर लाइट bands एवं dark bands पाये जाते हैं । 
  • प्रत्येक striped muscle एक संयोजी उत्तक से घिरा होता हैं, जिसे endomycium कहते हैं । 
  • ये पेशियाँ कंकाल से जुड़ी होती हैं , इसलिए इन्हें कंकाल पेशियाँ भी  कहते हैं । 
  • ये पेशियाँ हमारी इच्छानुसार कार्य करती है । 
  • इसलिए इन्हे एच्छिक पेशियाँ (Voluntary Muscles ) कहते हैं । 

(iii)हृदय पेशियाँ  (Cardiac muscles) :- 

  • ये पेशियाँ हृदय में पायी जाती है तथा ये स्वभाव में अनैच्छिक होती है । 
  • संरचना की दृष्ठि से रंखित पेशियाँ से मिलती-जिलती हैं । 
  • ये पेशियाँ जीवनभर गति करती रहती हैं । 

निष्कर्ष
दोस्तों आज के इस आर्टिकल में हम सब ने Connective tissue | Muscular tissue के बारे में जाना है बहुत सारे Connective tissue और Muscular tissue के मुख्य के बारे में बात किया यदि आपको Connective tissue और Muscular tissue से जुड़ा आज का पोस्ट पसंद आया हो तो इसे शेयर और कोई त्रुटि रह गया हो तो कमेंट करके अवगत कराये धन्यवाद ।

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